कुषाण वंश

कुषाण वंश

  1. पहल्व के बाद कुषाण आए, जो यूची एवं तोखरी भी कहलाते थे।
  2. कुषाण वंश का संस्थापक था- कुजूल कडफिसेस।
  3. कुषाण वंश का सबसे प्रतापी राजा था - कनिष्क ।
  4. कनिष्क की राजधानी थी - पुरुषपुर या पेशावर।
  5. कुषाणों की दूसरी राजधानी थी - मथुरा।
  6. कनिष्क ने 78 ई० गद्दी पर बैठने के बाद एक संवत चलाया जो शक संवत कहलाता है और भारत सरकार द्वारा प्रयोग में लाया जाता है।
  7. बौद्ध धर्म की चौथी बौद्ध संगीति कनिष्क के शासन काल में कुंडलवन जो कश्मीर में है, प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान वसुमित्र की अध्यक्षता में हुई थी।
  8. आरंभिक कुषाण शासको ने भारी संख्या में स्वर्ण मुद्राएं मुद्राएं जारी की जिन की शुद्धता गुप्त काल की स्वर्ण मुद्राओं से उत्कृष्ट है । कनिष्क का राजकवि अश्वघोष था।
  9. कनिष्क का राज वैद्य आयुर्वेद का विख्यात विद्वान चरक था जिसने चरक संहिता की रचना की।
  10. बुद्ध चरित्र, सौंदरानंद और सूत्र अलंकार अश्वघोष की प्रसिद्ध रचना है।
  11. बौद्ध का रामायण बुद्ध चरित्र को कहा जाता है।
  12. महाविभाष सूत्र के रचनाकार वसुमित्र है इसे ही बौद्ध धर्म का विश्वकोश कहा जाता है।
  13. अश्वघोष, वसुमित्र, पार्श्व, चरक, नागार्जुन, महाचेत और संघरक्ष, कनिष्क के दरबार की विभूति थे।
  14. भारत का आइंस्टीन नागार्जुन को कहा जाता है, इनकी पुस्तक माध्यमिक सूत्र है। इस पुस्तक में नागार्जुन ने सापेक्षता का सिद्धांत प्रस्तुत किया था।
  15. गांधार शैली एवं मथुरा शैली का विकास कनिष्क के शासन काल में हुआ था।
  16. कुषाण वंश का अंतिम शासक वासुदेव था।

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