पुष्यभूति वंश

पुष्यभूति वंश
  1. गुप्त वंश के पतन के बाद हरियाणा के अंबाला जिले के थानेश्वर नामक स्थान पर नरवध्र्दन द्वारा पुष्यभूति वंश की स्थापना हुई।
  2. पुष्यभूति वंश का सबसे शक्तिशाली शासक प्रभाकर वर्धन था।
  3. प्रभाकर वर्धन ने अपनी पुत्री राजश्री का विवाह मौखरि वंश के शासक ग्रह वर्मन से किया।
  4. मालवा नरेश देवगुप्त एवं गौड़ शासक शशांक ने मिलकर ग्रह वर्मन की हत्या कर दी।
  5. प्रभाकर वर्मन के बाद राज्यवर्धन गद्दी पर बैठा जिसकी हत्या शशांक गौर शासक ने कर दी।
  6. राजवर्धन के बाद 606 ईस्वी में 16 वर्ष की अवस्था में हर्षवर्धन राजगद्दी पर बैठा।
  7. हर्षवर्धन की प्रथम राजधानी थानेश्वर कुरुक्षेत्र के निकट थी, बाद में उसने अपनी राजधानी क़न्नौज में स्थापित कर दिया।
  8. हर्षवर्धन के दरबार का प्रसिद्ध दरबारी कवि था - बाणभट्ट।
  9. हर्ष चरित का लेखक बाणभट्ट है।
  10. हर्षवर्धन शिव का उपासक था। 
  11. हर्षवर्धन की रचना है- नागानंद, रत्नावली और प्रियदर्शिका।
  12. चीनी यात्री हेनसांग हर्षवर्धन के शासनकाल में आया था।
  13. हर्षवर्धन को दक्षिण भारत के शासक पुलकेशिन द्वितीय (चालुक्य वंश) ने ताप्ती नदी के किनारे 630 ईस्वी में हराया।
  14. हर्ष शिलादित्य के नाम से भी जाना जाता था तथा इसने परम भट्टारक नरेश की उपाधि धारण की थी।

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